Monday, 20 November 2017

नन्हे ख्वाब


ये आसमान में टिमटिमाते तारे ,
मेरे पास होते तो कितना अच्छा होता,
रात को घर के दहलीज पर रखती ,
घर आँगन में उजियारा होता। 

पकड़ कर नीचे लाऊंगी 'चंदा' मामा को,
पूछूँगी कई सवाल ,
उनके घटते - बढ़ते आकार का ,
आखिर क्या है राज ?

ये सूरज जो दिन में चमकता है ,
रात को सोने कहाँ चला जाता है ,
जाना चाहती हूँ उस पहाड़ के पार ,
किस गद्दे पर सोते है ये महाराज। 

मैं भी चिड़िया बनूँगी एक दिन ,
घुमूंगी सारा संसार ,
देखूंगी ऊपर आसमान से ,
कहाँ कहाँ लगते है खिलौने के बाजार। 

एक तितली को पकड़ कर लाऊंगी ,
कहाँ से लाती हो ये रँग भरे पंख ,
मुझे भी सिखा  दो ,
   बिखर क्यों जाते है हर बार कॉपी में मुझसे रंग।  

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