ये आसमान में टिमटिमाते तारे
,
मेरे पास होते तो कितना अच्छा
होता,
रात को घर के दहलीज पर रखती
,
घर आँगन में उजियारा होता।
पकड़ कर नीचे लाऊंगी 'चंदा'
मामा को,
पूछूँगी कई सवाल ,
उनके घटते - बढ़ते आकार का
,
आखिर क्या है राज ?
ये सूरज जो दिन में चमकता है
,
रात को सोने कहाँ चला जाता
है ,
जाना चाहती हूँ उस पहाड़ के
पार ,
किस गद्दे पर सोते है ये महाराज।
मैं भी चिड़िया बनूँगी एक दिन
,
घुमूंगी सारा संसार ,
देखूंगी ऊपर आसमान से ,
कहाँ कहाँ लगते है खिलौने के
बाजार।
एक तितली को पकड़ कर लाऊंगी
,
कहाँ से लाती हो ये रँग भरे
पंख ,
मुझे भी सिखा दो ,
बिखर क्यों जाते है हर
बार कॉपी में मुझसे रंग।

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